KGMU में पाँच वर्षीय बच्चे के कोलेडोकल सिस्ट का रोबोटिक सर्जरी से सफल इलाज

लखनऊ, 29 अगस्त।

एडवांस्ड पीडियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने पाँच वर्षीय बच्चे में जन्मजात पित्त नली की विकृति कोलेडोकल सिस्ट (Choledochal Cyst) का सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी द्वारा इलाज किया।

कोलेडोकल सिस्ट पित्त नली के असामान्य फैलाव की स्थिति है, जिसके कारण आंत में पित्त के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इस शल्य प्रक्रिया में असामान्य पित्त नली को निकालने के बाद आंत में पित्त के निकास मार्ग का पुनर्निर्माण किया जाता है।

कोलेडोकल सिस्ट एक दुर्लभ बीमारी है। पश्चिमी आबादी में लगभग हर 1 लाख से 1.5 लाख जीवित जन्मों में से एक में यह समस्या देखी जाती है, हालांकि एशिया के कुछ हिस्सों में इसके मामले काफी अधिक पाए गए हैं। इससे पेट में दर्द, पीलिया और बार-बार संक्रमण हो सकता है। लिवर की दीर्घकालिक समस्याओं और अन्य जटिलताओं से बचने के लिए इसकी शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी बेहद जरूरी है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर निवासी पाँच वर्षीय बच्चे राज (नाम बदला हुआ) को एक वर्ष की उम्र से ही पेट में दर्द और उल्टी की समस्या थी। उसके माता-पिता ने सीतापुर में कई डॉक्टरों से परामर्श लिया, लेकिन बच्चे को आराम नहीं मिला। इसके बाद वे बच्चे को KGMU के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की OPD में लेकर आए।

विस्तृत क्लिनिकल और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद प्रोफेसर (डॉ.) अर्चिका गुप्ता ने बच्चे में कोलेडोकल सिस्ट की पहचान की और संभावित जटिलताओं से बचाव के लिए सर्जरी द्वारा इसे निकालने की सलाह दी। उन्होंने परिवार को रोबोटिक सर्जरी की सटीकता और शीघ्र रिकवरी के लाभों के बारे में समझाया। इसके बाद परिवार ने रोबोटिक सर्जरी के लिए सहमति प्रदान की।

प्रोफेसर (डॉ.) अर्चिका गुप्ता और उनकी टीम ने बच्चे पर चार छोटे की-होल चीरों के जरिए रोबोटिक सर्जरी की। इस दौरान प्रभावित बाइल डक्ट को हटाया गया और इसके बाद आंत के हिस्से में बाइल के सामान्य बहाव के लिए रास्ते का पुनर्निर्माण किया गया।

ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरा हुआ। बच्चे की रिकवरी तेज रही और सर्जरी के बाद उसे बहुत कम दर्द हुआ। उसने कुछ ही समय में खाना-पीना शुरू कर दिया। थोड़े समय अस्पताल में रहने के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई और अब वह स्वस्थ है।

सर्जिकल टीम

सर्जिकल टीम में प्रोफेसर (डॉ.) अर्चिका गुप्ता, डॉ. पीयूष कुमार, डॉ. मनीष राजपूत, डॉ. अमोल अग्रवाल और डॉ. स्वप्निल सिंह शामिल थे।

एनेस्थीसिया की सेवाएं डॉ. रामगोपाल मौर्य और उनकी टीम ने दीं, जो एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. मोनिका कोहली की देखरेख में कार्य कर रहे थे।

रोबोटिक ओटी की सिस्टर-इन-चार्ज श्रीमती रीता, नर्सिंग स्टाफ श्री संजय सिंह, श्री राजीव यादव, श्री आकाश बाबू और श्री पवन कुमार, तथा ओटी तकनीशियन सुश्री सोनम गुप्ता और श्री कुलदीप सिंह का भी समर्पित सहयोग रहा।

मुख्य सर्जन ने क्या कहा?

मुख्य सर्जन प्रोफेसर (डॉ.) अर्चिका गुप्ता ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी की मदद से बेहतर विज़ुअलाइज़ेशन और सटीकता के साथ ऑपरेशन करना संभव हुआ। इससे बेहद छोटी जगह में भी बारीकी से काम करने में मदद मिली और आसपास के टिश्यू को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए सिस्ट को हटाने तथा बाइल ड्रेनेज का पुनर्निर्माण करने में सफलता मिली।

उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी PGIMER, चंडीगढ़ के प्रोफेसर रवि प्रकाश कनौजिया कर रहे थे। टीम की प्राथमिकता ऑपरेशन को सुरक्षित तरीके से पूरा करना और बच्चे को जल्द से जल्द स्वस्थ करना था।

रोबोटिक सर्जरी को लेकर विशेषज्ञ की राय

प्रोफेसर (डॉ.) रवि प्रकाश कनौजिया ने कहा कि बच्चों की जटिल बिलियरी सर्जरी के लिए रोबोटिक प्लेटफॉर्म एक बेहतरीन उपकरण है। इसमें मैग्निफाइड 3D विज़न के साथ बारीक इंस्ट्रूमेंट कंट्रोल की सुविधा मिलती है।

उन्होंने कहा कि देशभर में अभी भी कुछ ही केंद्रों पर इस तरह की सर्जरी की जाती है। KGMU, लखनऊ के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में इस सफल प्रक्रिया से बच्चों को वर्ल्ड-क्लास, मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल केयर उपलब्ध कराने की बढ़ती क्षमता प्रदर्शित होती है। उन्होंने पूरी टीम को सफल प्रक्रिया और बेहतर शुरुआती परिणामों के लिए बधाई दी।

इस छोटे बच्चे में रोबोटिक सर्जरी का सफल इस्तेमाल KGMU में पीडियाट्रिक सर्जरी, विशेषकर रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की बढ़ती उपलब्धता को दर्शाता है।

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